भारतीय शास्त्रीय नृत्य: 2026 की नई डिजिटल रजिस्ट्री
परीक्षा हेतु प्रमुख बिंदु
- संगीत नाटक अकादमी: संस्कृति मंत्रालय के अधीन प्रदर्शन कलाओं की सर्वोच्च संरक्षक संस्था।
- अनुच्छेद 51A(f): नागरिकों का मौलिक कर्तव्य, जो सामासिक संस्कृति की रक्षा का निर्देश देता है।
- नाट्यशास्त्र: भरत मुनि रचित प्राचीन ग्रंथ जो शास्त्रीय नृत्यों का आधार है।
कल की महत्वपूर्ण घटना: 10 अक्टूबर 2026 को संस्कृति मंत्रालय ने भारत के 8 शास्त्रीय नृत्यों की राष्ट्रीय रजिस्ट्री को आधिकारिक रूप से समेकित किया है।
सरकार ने सदियों पुरानी 'गुरु-शिष्य परंपरा' को आधुनिक डिजिटल स्वरूप देने का निर्णय लिया है। भरतनाट्यम की लयबद्धता और कथक की कथावाचन शैली अब केवल पांडुलिपियों तक सीमित नहीं रहेगी। ये कलाएं अब आधुनिक भारत की डिजिटल पहचान का हिस्सा बन चुकी हैं।
प्रभाव का विस्तार
| प्रभाव क्षेत्र | विवरण |
|---|---|
| प्रशासनिक | एकीकृत डिजिटल रजिस्ट्री से अनुदान और मान्यता प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी। |
| आर्थिक | डिजिटल प्रशिक्षण मॉड्यूल से एड-टेक और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। |
| रणनीतिक | मानकीकरण भारत को सांस्कृतिक कूटनीति में वैश्विक अगुआ बनाएगा। |
भविष्य की कार्ययोजना
- चरण I (31 मार्च 2027): प्रशिक्षण मॉड्यूल का पूर्ण डिजिटल रूपांतरण।
- चरण II (10 अक्टूबर 2028): सभी राज्यों में फ्रेमवर्क का कार्यान्वयन।
- चरण III (10 अक्टूबर 2031): संस्कृति मंत्रालय द्वारा नीति का 5-वर्षीय ऑडिट।