🎯 Question #14Ecology & Biodiversity 📅 08 October 2026

जैविक विविधता पर कन्वेंशन (CBD) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. यह एक कानूनी रूप से बाध्यकारी अंतरराष्ट्रीय संधि है जिसके मुख्य उद्देश्यों में जैविक विविधता का संरक्षण और इसके घटकों का सतत उपयोग शामिल है। 2. जैविक विविधता पर कन्वेंशन के ढांचे और कार्यान्वयन के लिए स्वदेशी और पारंपरिक पारिस्थितिक ज्ञान अप्रासंगिक है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Select an option above, then submit
Context Analysis

📖 In-Depth Fact-Check & Editorial Background

Read Article View →

This question was curated from today's in-depth analytical breakdown: भारत में जैव विविधता संरक्षण और जलवायु लचीलापन

पारिस्थितिकी और जैव विविधता संरक्षण

स्वदेशी ज्ञान के एकीकरण के माध्यम से क्षेत्रीय पर्यावरण नीतियों में संरचनात्मक बदलाव का विश्लेषण।

मुख्य परीक्षा विषय एवं अवधारणाएँ

  • अनुच्छेद 48क (भारतीय संविधान - Article 48A): राज्य को पर्यावरण की रक्षा और सुधार करने तथा देश के वनों और वन्यजीवों की रक्षा करने का निर्देश देता है, जो पारिस्थितिक नीतियों का एक संवैधानिक स्तंभ है।
  • जैविक विविधता पर कन्वेंशन (CBD): एक कानूनी रूप से बाध्यकारी अंतर्राष्ट्रीय संधि, जिसके मुख्य विषयगत क्षेत्र सतत विकास, जैव विविधता के संरक्षण और लाभ के निष्पक्ष बँटवारे पर केंद्रित हैं।
  • उत्तर पूर्व जैव विविधता एकीकरण: नाजुक भू-दृश्यों में जलवायु लचीलेपन के लिए स्वदेशी पारंपरिक पारिस्थितिक ज्ञान का समकालीन वैज्ञानिक ढाँचों के साथ अभिसरण।

मुख्य उत्प्रेरक: 8 अक्टूबर 2026 को, नागालैंड विश्वविद्यालय ने जैव विविधता संरक्षण और जलवायु लचीलेपन पर एक प्रमुख राष्ट्रीय सम्मेलन की मेजबानी की, जिसने पूर्वोत्तर भारत में आधुनिक पर्यावरण विज्ञान के साथ स्वदेशी ज्ञान को एकीकृत करने की दिशा में एक रणनीतिक बदलाव को उत्प्रेरित किया।

नीतिगत बदलाव

कल्पना कीजिए कि पूर्वी हिमालय के आर-पार एक विशाल, जटिल मकड़ी का जाला फैला हुआ है। जब तापमान या नीति में अचानक बदलाव के कारण इसका कोई एक धागा भी हिलता है, तो पूरा जाला कांप उठता है। 8 अक्टूबर 2026 को भारत के पर्यावरणीय तालाब में नीतिगत संवाद का एक बड़ा पत्थर फेंका गया: नागालैंड विश्वविद्यालय ने जैव विविधता संरक्षण और जलवायु लचीलेपन को समर्पित एक राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया। शांत झील के केंद्र में भारी चट्टान गिराए जाने की तरह, इस आयोजन ने क्षेत्रीय शासन, आर्थिक ढाँचों और दीर्घकालिक वैश्विक जलवायु रणनीतियों पर दूरगामी प्रभाव डाले।


क्षेत्रीय प्रभाव विश्लेषण

  • तात्कालिक क्षेत्रीय प्रभाव: पूर्वोत्तर भारत के क्षेत्रीय वानिकी विभागों और शैक्षणिक संस्थानों को सीधे तौर पर प्रभावित करते हुए, इस सम्मेलन ने एक त्वरित बदलाव को अनिवार्य बना दिया है। संरक्षणविद् और नीति निर्माता अब केवल पेड़-पौधों और जीवों की संख्या गिनने से आगे बढ़कर इन नाजुक क्षेत्रों के गुणात्मक पारिस्थितिक स्वास्थ्य का मूल्यांकन कर रहे हैं, जो पश्चिमी घाट में आवश्यक कठोर निगरानी ढाँचों के समान है।
  • आर्थिक एवं नागरिक प्रभाव: चूँकि जलवायु की अनिश्चितता स्थानीय आजीविका के लिए खतरा बन रही है, यह नीतिगत बदलाव जमीनी स्तर के समुदायों और हरित उद्यमों तक पहुँचता है। पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक वैज्ञानिक उपकरणों—जैसे उन्नत कार्बन प्रग्रहण पद्धतियों—के साथ संस्थागत रूप से जोड़कर, टिकाऊ हरित रोजगार और ग्रामीण जैव-अर्थव्यवस्था के लिए नए रास्ते खुलते हैं।
  • दीर्घकालिक रणनीतिक प्रभाव: वर्ष 2026 और उसके बाद वैश्विक पर्यावरणीय मानचित्र पर भारत की स्थिति को मजबूत करते हुए, ये स्थानीयकृत ढाँचे जैव विविधता पर कन्वेंशन के तहत भारत की अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं को सीधे तौर पर पूरा करते हैं। यह साबित करके कि जमीनी स्तर की स्वदेशी प्रथाओं को अत्याधुनिक विज्ञान के साथ आगे बढ़ाया जा सकता है, भारत जलवायु परिवर्तन के खिलाफ 'ग्लोबल साउथ' के लिए एक अनुकरणीय खाका तैयार करता है।

आवश्यक शब्दावली एवं परिभाषाएँ

जलवायु लचीलापन: इसे किसी पारिस्थितिकी तंत्र की 'प्रतिरक्षा प्रणाली' मानिए। जिस प्रकार एक स्वस्थ मानव शरीर संक्रमण से लड़कर तेजी से ठीक हो जाता है, उसी तरह एक जलवायु-लचीला जंगल या वेटलैंड पूरी तरह नष्ट हुए बिना सूखे या बाढ़ जैसे चरम मौसमी झटकों को सहन कर लेता है।

कार्बन प्रग्रहण: पानी सोखने वाले एक विशाल स्पंज की कल्पना कीजिए। पर्यावरणीय शब्दों में, यह ग्लोबल वार्मिंग को कम करने के लिए वायुमंडलीय कार्बन डाइऑक्साइड को प्राकृतिक या कृत्रिम रूप से कैप्चर और स्टोर करने की प्रक्रिया है।


भविष्य का रोडमैप मैट्रिक्स

लक्ष्य समयावधिमील का पत्थर / फोकस क्षेत्रमुख्य समीक्षा बिंदु
चौथी तिमाही 2026पूर्वोत्तर भारत में वैज्ञानिक निगरानी के साथ स्वदेशी ढाँचों का एकीकरण।नागालैंड विश्वविद्यालय सम्मेलन के बाद की नीति कार्यान्वयन समीक्षा।
2027–2030पश्चिमी घाट और हिमालयी क्षेत्रों में गुणात्मक पारिस्थितिक स्वास्थ्य मीट्रिक का विस्तार।अनुच्छेद 48क अनुपालन दिशानिर्देशों के तहत मध्यावधि राष्ट्रीय जैव विविधता लेखा परीक्षा।
2031 और उसके बादराष्ट्रीय कार्बन तटस्थता लक्ष्यों के लिए उन्नत समुद्री तकनीकों की तैनाती।राष्ट्रीय जलवायु लचीलापन सूचकांक मूल्यांकन।

Practice More Quizzes

Sharpen your accuracy with hundreds of curated daily MCQs.

← All Practice Questions
An unhandled error has occurred. Reload 🗙

Rejoining the server...

Rejoin failed... trying again in seconds.

Failed to rejoin.
Please retry or reload the page.

The session has been paused by the server.

Failed to resume the session.
Please retry or reload the page.