🎯 Question #21Conservation Efforts 📅 08 October 2026

लिविंग प्लैनेट इंडेक्स (LPI) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. यह समय के साथ निगरानी की जाने वाली जंगली प्रजातियों की वैश्विक प्रचुरता में परिवर्तन को ट्रैक करने के लिए उपयोग किया जाने वाला एक मानकीकृत वैज्ञानिक संकेतक है। 2. इसे संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) और जलवायु परिवर्तन पर अंतरसरकारी पैनल (IPCC) द्वारा संयुक्त रूप से प्रतिवर्ष प्रकाशित किया जाता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

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This question was curated from today's in-depth analytical breakdown: 1970 से वैश्विक वन्यजीव आबादी में 73% की भारी गिरावट

1970 से वैश्विक वन्यजीव आबादी में 73% की भारी गिरावट

महत्वपूर्ण परीक्षा विषय एवं अवधारणाएँ
  • लिविंग प्लैनेट इंडेक्स (LPI) / जैव विविधता मीट्रिक: विश्व वन्यजीव फंड द्वारा उपयोग किया जाने वाला मानकीकृत वैज्ञानिक पैमाना, जो जंगली जीवों की आबादी के वैश्विक उतार-चढ़ाव को ट्रैक करता है।
  • वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972: भारत का बुनियादी वैधानिक ढांचा जो जंगली जानवरों, पक्षियों और पौधों को कानूनी सुरक्षा प्रदान करता है।
  • खुले प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र और घास के मैदानों का प्रबंधन: पारंपरिक घने जंगलों से अलग, देशी घास के मैदान और झाड़ीदार क्षेत्र जो विशिष्ट स्थानिक वनस्पतियों का समर्थन करते हैं।

को, वर्ल्ड वाइड फंड फॉर नेचर ने अपनी प्रमुख रिपोर्ट जारी की, जिससे खुलासा हुआ कि 1970 से 2022 के बीच वैश्विक स्तर पर निगरानी किए जाने वाले जंगली जीवों की संख्या में औसतन 73% की गिरावट आई है।

कल्पना कीजिए एक ऐसे विशाल पुस्तकालय की, जहाँ काम करने की एक ही पीढ़ी के भीतर अलमारियों से हर चार में से तीन किताबें चुपचाप गायब हो चुकी हों। यह वही कठोर सच्चाई है जिसे दुनिया के सामने रखा गया। स्तनधारियों, पक्षियों, उभयचरों, सरीसृपों और मछलियों की निगरानी की जाने वाली आबादी में औसतन 73% की भारी गिरावट दर्ज की गई। यह तेज गिरावट एक कठोर ग्रह-स्तरीय खतरे की घंटी की तरह है, जो यह संकेत देती है कि हमारे पारिस्थितिकी तंत्र को स्थिर रखने वाला जटिल जीवन चक्र कमजोर हो रहा है।

संरक्षण प्रयास और जैव विविधता मीट्रिक मैट्रिक्स
प्रमुख आयामसत्यापित विवरण / मीट्रिक
शासी प्राधिकरणवर्ल्ड वाइड फंड फॉर नेचर / पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, भारत
वित्तीय परिव्यय / पैमानाहजारों निगरानी प्राप्त प्रजातियों की आबादी पर 52 वर्षों (1970 से 2022) के डेटा का वैश्विक आकलन
समय सीमा / नियत तारीख1970 से शुरू होकर की महत्वपूर्ण रिपोर्ट तिथि तक मापा गया बेसलाइन डेटा
प्राथमिक लाभार्थी / लक्ष्यवैश्विक वन्यजीव आबादी, राष्ट्रीय गैर-वन पारिस्थितिकी तंत्र, और स्थानीय जलवायु लचीलापन फ्रेमवर्क

3 मुख्य स्तंभ

  • वैश्विक जैव विविधता पतन (1970–2022): यह डेटा एक प्रणालीगत संकट को उजागर करता है। निगरानी की गई जंगली प्रजातियों की आबादी में 73% की गिरावट मानवीय दबावों की ओर इशारा करती है, जिसमें आवास विखंडन और जलवायु परिवर्तन शामिल हैं।
  • भारत की शीर्ष शिकारी संरक्षण क्षमता: वैश्विक गिरावट के बीच, भारत एक महत्वपूर्ण अभ्यारण्य के रूप में खड़ा है, जहाँ दुनिया की कुल बाघ आबादी का लगभग 70% हिस्सा निवास करता है। वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 जैसे समर्पित वैधानिक उपकरण शीर्ष शिकारियों को सुरक्षित रखते हैं।
  • जंगलों से परे: घास के मैदान और खुले प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र: पारंपरिक संरक्षण ने ऐतिहासिक रूप से घने जंगलों को प्राथमिकता दी है। भारत ने घास के मैदानों और खुले प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र पर अपनी पहली गाइड लॉन्च की है जो उपेक्षित शुष्क भूमि की सुरक्षा करती है।

इन आँकड़ों से मिलने वाला रणनीतिक सबक बिल्कुल स्पष्ट है। लक्षित कानूनी फ्रेमवर्क राष्ट्रीय सीमाओं के भीतर बाघों को सुरक्षित कर सकते हैं, लेकिन व्यापक 73% वैश्विक वन्यजीव गिरावट को पलटने के लिए एक तत्काल और बड़े बदलाव की आवश्यकता है। देशों को केवल वन संरक्षण से आगे बढ़कर उपेक्षित गैर-वन पारिस्थितिकी तंत्र को पुनर्जीवित करना होगा।

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