🎯 Question #10Medieval India 📅 09 October 2026

यूनेस्को विश्व धरोहर नामांकन प्रक्रिया और भारत के विरासत शासन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. यूनेस्को की संभावित सूची में शामिल होना एक अनिवार्य पूर्वशेक है और औपचारिक नामांकन dossier प्रस्तुत करने से पहले संपत्तियों को इस रजिस्टर पर न्यूनतम एक निरंतर वर्ष की अवधि के लिए रहना आवश्यक है। 2. प्राचीन स्मारक और पुरातात्विक स्थल और अवशेष (AMASR) अधिनियम, 1958 घरेलू विधिक ढांचा प्रदान करता है जिसके तहत भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) केंद्रीय रूप से सुरक्षित स्मारकों की रक्षा करता है। 3. भारत के संविधान का अनुच्छेद 49 एक न्यायोचित मौलिक अधिकार है जो नागरिकों को स्मारक संरक्षण के प्रवर्तन के लिए सीधे सर्वोच्च न्यायालय जाने का अधिकार देता है। उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

Select an option above, then submit
Context Analysis

📖 In-Depth Fact-Check & Editorial Background

Read Article View →

This question was curated from today's in-depth analytical breakdown: भारत की यूनेस्को अस्थायी सूची में अब 78 ऐतिहासिक धरोहरें

महत्वपूर्ण परीक्षा उपयोगी अवधारणाएं

  • यूनेस्को अस्थायी सूची एवं OUV: यूनेस्को के परिचालन दिशा-निर्देशों के अनुसार किसी भी ऐतिहासिक स्थल को औपचारिक विश्व धरोहर नामांकन में भेजने से पहले कम से कम एक वर्ष के लिए देश की आधिकारिक अस्थायी सूची में दर्ज होना अनिवार्य है।
  • AMASR अधिनियम, 1958: 'प्राचीन संस्मारक तथा पुरातत्वीय स्थल और अवशेष अधिनियम', जो भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को देश भर के ऐतिहासिक ढांचों के संरक्षण और विनियमन का वैधानिक अधिकार देता है।
  • भारतीय संविधान का अनुच्छेद 49: राज्य के नीति निर्देशक तत्वों के तहत यह राज्य को राष्ट्रीय महत्व के स्मारकों और कलात्मक स्थलों को विरूपण, विनाश अथवा अनधिकृत निर्यात से सुरक्षित रखने का संवैधानिक दायित्व सौंपता है।

घटनाक्रम का केंद्रबिंदु: 8 अक्टूबर 2026 को संस्कृति मंत्रालय और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने 5 नए ऐतिहासिक स्थलों के प्रस्ताव प्रस्तुत कर यूनेस्को की विश्व धरोहर अस्थायी सूची में संपत्तियों की कुल संख्या 78 कर दी।

वैधानिक धरोहर संरक्षण और नया विस्तार

वैश्विक धरोहर प्रबंधन एक कठोर विनियामक प्रक्रिया है। कोई भी ऐतिहासिक स्थल बिना पूर्व सूचीकरण के अंतिम अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त नहीं कर सकता। अक्टूबर 2026 में 5 नए प्रस्ताव जुड़ने के साथ भारत की यूनेस्को अस्थायी सूची 78 तक पहुंच गई; इसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के सांस्कृतिक प्रभाव को सुदृढ़ किया है। वस्तुतः इस पहल का आधार घरेलू वैधानिक तंत्र है। देश भर में 3,690 से अधिक केंद्र संरक्षित स्मारक AMASR अधिनियम, 1958 के अंतर्गत नियमित होते हैं। विशेष रूप से, दक्कन के दुर्गों और मध्यकालीन प्रशासनिक परिसरों का स्थापत्य इन नामांकनों का प्रमुख आधार है।

धरोहर अभिशासन की सांख्यिकी रूपरेखा
प्रमुख आयामवैधानिक विवरण अथवा आंकड़ा
शासी प्राधिकरणभारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) / संस्कृति मंत्रालय
अस्थायी सूची का आकार78 संपत्तियां (अक्टूबर 2026 में 5 नए स्थलों का समावेशन)
घरेलू वैधानिक विस्तारAMASR अधिनियम, 1958 के अंतर्गत 3,690 से अधिक स्मारक
संवैधानिक अधिदेशअनुच्छेद 49 (राज्य के नीति निर्देशक तत्व)
अनिवार्य परिपक्वता अवधिअंतिम नामांकन से पूर्व अस्थायी सूची में न्यूनतम 1 वर्ष का प्रवास

मध्यकालीन स्थापत्य और संस्थागत मानक

अस्थायी सूची में स्थान पाना कोई मानद उपाधि नहीं है। यह विश्व धरोहर अभिसमय के तहत एक बाध्यकारी कानूनी शर्त है। प्रत्येक स्थल को कम से कम एक वर्ष तक इस सूची में रहना होता है। इस अवधि में तकनीकी विशेषज्ञ विस्तृत डोजियर तैयार करते हैं; वे तुलनात्मक ऐतिहासिक विश्लेषण और बफर जोन की सीमाओं का सीमांकन करते हैं।

ऐतिहासिक रूप से, मध्यकालीन भारत ने निर्माण तकनीकों में मूलभूत प्रयोग किए। शहतीरी धरन-शैली और मेहराबी गुंबद-शैली का संगम इसी दौर में हुआ। प्रायद्वीपीय भारत में दक्कन सल्तनतों और विजयनगर के शासकों ने जटिल गुरुत्वाकर्षण-आधारित जल प्रणालियों तथा ध्वनि-सैन्य प्राचीरों का निर्माण किया। इन स्मारकों को अंतरराष्ट्रीय सूची में ले जाने से वैज्ञानिक संरक्षण को गति मिलती है।

जमीनी स्तर पर, अनुच्छेद 49 राज्य को स्मारकों के संरक्षण का स्पष्ट निर्देश देता है। अंतरराष्ट्रीय सूचीकरण से अंतर-मंत्रालयी संसाधन सक्रिय होते हैं। स्थानीय प्रशासन अनियंत्रित शहरी निर्माण को रोकने के लिए निषिद्ध क्षेत्र तय करता है। साथ ही, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण आधुनिक लीडार स्कैनिंग, संरचनात्मक ग्राउटिंग और रासायनिक पाषाण उपचार के जरिए इन मध्यकालीन स्मारकों को सुरक्षित रखता है।

रणनीतिक निष्कर्ष

धरोहर संरक्षण केवल भावनात्मक सरोकार नहीं है; यह एक सुनियोजित कानूनी प्रक्रिया है। मध्यकालीन किलों और जल-परिसरों को AMASR अधिनियम तथा यूनेस्को की एक-वर्षीय जांच प्रक्रिया से जोड़कर भारत अनुच्छेद 49 के संवैधानिक संकल्पों को धरातल पर क्रियान्वित कर रहा है।

Practice More Quizzes

Sharpen your accuracy with hundreds of curated daily MCQs.

← All Practice Questions
An unhandled error has occurred. Reload 🗙

Rejoining the server...

Rejoin failed... trying again in seconds.

Failed to rejoin.
Please retry or reload the page.

The session has been paused by the server.

Failed to resume the session.
Please retry or reload the page.