🎯 Question #3External Sector & Global Economy 📅 09 October 2026

निम्नलिखित में से कौन सा विकल्प 'आयातित मुद्रास्फीति' (imported inflation) नामक आर्थिक परिघटना का सबसे अच्छा वर्णन करता है?

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This question was curated from today's in-depth analytical breakdown: वैश्विक तकनीकी निवेश और आरबीआई का सधा मौद्रिक रुख

सधे कदम: वैश्विक उथल-पुथल के बीच भारत का मौद्रिक संतुलन

बीते कल का घटनाक्रम: 9 अक्टूबर, 2026 को भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर ने कहा कि प्रौद्योगिकी निवेश के दम पर 2026 में वैश्विक आर्थिक वृद्धि में मामूली सुधार होगा। यह बयान 7 अक्टूबर, 2026 को मौद्रिक नीति समिति द्वारा रेपो दर 25 आधार अंक बढ़ाकर 5.50% करने और 'कैलिब्रेटेड टाइटनिंग' अपनाने के तुरंत बाद आया।

अनपेक्षित झटके मजबूत नियंत्रण की मांग करते हैं। राजमार्ग पर तेज हवा का थपेड़ा लगने पर चालक अचानक ब्रेक नहीं दबाता; वह केवल स्टीयरिंग पर पकड़ मजबूत करता है।

आरबीआई ने 7 अक्टूबर, 2026 को रेपो दर 25 आधार अंक बढ़ाकर 5.50% करते हुए ठीक यही रणनीति अपनाई। दो दिन बाद, 9 अक्टूबर को गवर्नर ने जमीनी हकीकत स्पष्ट की। जहां आधुनिक तकनीकों पर अंतरराष्ट्रीय कंपनियों का पूंजीगत व्यय वैश्विक उत्पादन को संबल दे रहा है, वहीं भू-राजनीतिक खिंचाव और कच्चे तेल के ऊंचे दाम सीमा पार से मूल्य वृद्धि का जोखिम पैदा कर रहे हैं। यह दर वृद्धि घरेलू उत्पादन को आहत किए बिना कीमतों को काबू में रखने वाला एक अग्रिम कदम है।

क्षेत्रवार असर और आर्थिक परिणाम

  • बैंकिंग और बाह्य क्षेत्र: वाणिज्यिक बैंकों ने तत्काल अपनी आधार उधारी दरों को नए स्तर पर व्यवस्थित किया। बैंकों के पास ऐतिहासिक रूप से मजबूत पूंजीगत बफर मौजूद हैं; अतः वे निजी क्षेत्र के ऋण प्रवाह को बाधित किए बिना बढ़ी हुई लागत को आसानी से झेल सकते हैं। विशेष रूप से, विशाल विदेशी मुद्रा भंडार महंगे ऊर्जा बिलों के झटके सहने और विनिमय दर में अनावश्यक गिरावट रोकने का काम करता है।
  • घरेलू कीमतें और विकास दर: इस सतर्क नीति के चलते आयातित महंगाई आम नागरिकों के घरेलू खर्च, माल ढुलाई और कारखानों की उत्पादन लागत को अनियंत्रित नहीं कर पाएगी। मुद्रास्फीति की प्रत्याशाओं को समय रहते थामकर केंद्रीय बैंक ने उपभोक्ता क्रय शक्ति की रक्षा की है। धरातल पर यह रणनीति चालू वित्त वर्ष में 8% जीडीपी वृद्धि दर का मार्ग प्रशस्त करती है।
  • दीर्घकालिक रणनीतिक स्थिति: पांच से दस वर्षों के परिप्रेक्ष्य में, भुगतान संतुलन को ऊर्जा झटकों से अलग रखना भारत को एक सुरक्षित निवेश गंतव्य बनाता है। सुदृढ़ बाह्य प्रबंधन के बल पर डिजिटल बुनियादी ढांचे, आधुनिक कारखानों और रणनीतिक ऊर्जा परिसंपत्तियों में सतत पूंजी प्रवाह बना रहेगा।

आवश्यक शब्दावली

कैलिब्रेटेड टाइटनिंग:
केंद्रीय बैंक का एक ऐसा नीतिगत ढांचा जहां ब्याज दरों में तेज उछाल के बजाय परिस्थितियों और प्राप्त आंकड़ों के आधार पर क्रमिक वृद्धि की जाती है।
पूंजीगत बफर:
वाणिज्यिक बैंकों द्वारा नियामकीय न्यूनतम सीमा से ऊपर रखी जाने वाली अतिरिक्त पूंजी, जो मंदी के दौर में वित्तीय झटकों को सोखने का काम करती है।
लचीला मुद्रास्फीति लक्ष्यीकरण:
आरबीआई अधिनियम की धारा 45ZB के तहत स्थापित वैधानिक व्यवस्था, जिसके अंतर्गत आर्थिक विस्तार को नुकसान पहुंचाए बिना खुदरा महंगाई को तय दायरे में सीमित रखना अनिवार्य है।

भावी नीतिगत रूपरेखा

प्रमुख आर्थिक लक्ष्य और समीक्षा बिंदु
समय-सीमाअपेक्षित मानकसमीक्षा बिंदु
चौथी तिमाही 2026खुदरा व कॉरपोरेट ऋणों में 5.50% रेपो दर का संचरणवाणिज्यिक उधारी और कॉरपोरेट बॉन्ड निर्गम पर संचरण का मूल्यांकन।
मध्य 2027कच्चे तेल से जनित आयातित महंगाई का स्थिरीकरणचालू खाता घाटा और विदेशी मुद्रा भंडार की पर्याप्तता की समीक्षा।
वित्त वर्ष 2027–28 अंत8% जीडीपी संवृद्धि दर की निरंतरताउन्नत विनिर्माण में पूंजीगत व्यय और निजी क्षेत्र के निवेश चक्र का सतत आकलन।

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