परीक्षा उपयोगी प्रमुख अवधारणाएं एवं तथ्य
कल का घटनाक्रम
: अंतरराष्ट्रीय वित्तीय विश्लेषक संस्था ब्लूमबर्ग ने अपने ताजा आर्थिक आकलन में भारत के लिए 170 अरब डॉलर के विनिर्माण अवसर को चिन्हित किया, जो बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के तेज क्रियान्वयन और कलपुर्जों पर आयात शुल्क में कटौती पर निर्भर है।
वृहद आर्थिक परिदृश्य: वैश्विक पुनर्गठन
वैश्विक व्यापार तंत्र तीन दशकों के सबसे तीव्र बदलाव से गुजर रहा है। बहुराष्ट्रीय कंपनियां उत्पादन केंद्रों का पुनर्गठन कर रही हैं; परिणामस्वरूप, भारत के सामने 170 अरब डॉलर का औद्योगिक अवसर उपस्थित है। केवल घोषणाएं पर्याप्त नहीं होंगी।
आधुनिक विनिर्माण एक संवेदनशील रिले दौड़ की तरह है। बेटन सौंपते समय यदि धावक लड़खड़ाए, तो पूरी बढ़त खत्म हो जाती है; बंदरगाहों पर लगने वाला अतिरिक्त समय निर्यात लाभ को समाप्त कर देता है। केंद्र सरकार ने 14 प्रमुख विनिर्माण क्षेत्रों में उत्पादन-संबद्ध प्रोत्साहन (PLI) योजना शुरू की है, जिसका लक्ष्य ₹3 लाख करोड़ से अधिक का वृद्धिशील उत्पादन और पूंजीगत निवेश जुटाना है। इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में इसके परिणाम दिखे हैं। हालांकि, सीमा शुल्क विसंगतियों और परिवहन लागत के मोर्चे पर सुधार अभी अधूरा है।
| मानक | वर्तमान स्थिति | नीतिगत लक्ष्य |
|---|---|---|
| लॉजिस्टिक्स लागत (जीडीपी अनुपात) | 8% से 9% | 8% से नीचे (वैश्विक मानक) |
| पीएलआई समर्थित क्षेत्र | 14 औद्योगिक क्षेत्र | ₹3 लाख करोड़ अतिरिक्त उत्पादन |
| कच्चे माल पर आयात शुल्क | कई घटकों पर अत्यधिक | तर्कसंगत व संतुलित दरें |
वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में आ रहे बदलावों का लाभ उठाकर भारत अपने औद्योगिक उत्पादन में 170 अरब डॉलर तक की वृद्धि कर सकता है, बशर्ते वह बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाए और आयात शुल्कों को युक्तिसंगत बनाए।
राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति के बाद भारत में लॉजिस्टिक्स लागत घटकर जीडीपी के 8% से 9% पर आंकी गई है, फिर भी पूर्वी एशियाई विनिर्माण केंद्रों से प्रतिस्पर्धा करने के लिए इसमें और सुधार आवश्यक है।
जमीनी हकीकत: आम नागरिक पर प्रभाव
औद्योगिक नीतियों का असर सीधे घरेलू अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। यह आर्थिक प्रवाह इस प्रकार काम करता है:
आपूर्ति श्रृंखला विविधीकरण -> लक्षित पीएलआई पूंजी निवेश -> सुगम माल ढुलाई तंत्र -> कुशल रोजगार व किफायती उत्पाद- प्रतियोगी परीक्षार्थियों के लिए: 1991 के वि-लाइसेंसिंग दौर और मौजूदा उत्पादन-संबद्ध हस्तक्षेपों के अंतर को समझना आवश्यक है। आर्थिक वृद्धि अब ऊंचे शुल्कों के पीछे छिपने से नहीं, बल्कि वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में सीधे जुड़ने से संभव है। मुख्य परीक्षा के लिए 14 पीएलआई क्षेत्र, ₹3 लाख करोड़ का निवेश लक्ष्य और लॉजिस्टिक्स लागत को 8% से नीचे लाने के प्रयास बुनियादी बिंदु हैं।
- पेशेवरों और उपभोक्ताओं के लिए: माल ढुलाई खर्च में प्रत्येक प्रतिशत की कटौती राष्ट्रीय स्तर पर अप्रत्यक्ष कर छूट के समान लाभ देती है। कारखानों में कलपुर्जे समय पर पहुँचने से उद्यमों को अनावश्यक भंडार नहीं रखना पड़ता; इसके परिणामस्वरूप कारखाने केवल महानगरों तक सीमित न रहकर छोटे शहरों में स्थापित होते हैं। तकनीशियनों और अभियंताओं के लिए औपचारिक रोजगार के अवसर बढ़ते हैं, जबकि आम जनता को प्रतिस्पर्धी दरों पर उपभोक्ता वस्तुएं प्राप्त होती हैं।
आगे की राह
नीतियों की कागजी घोषणाओं से आगे बढ़कर अब मैदानी क्रियान्वयन पर ध्यान देना होगा। इस 170 अरब डॉलर के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए आयात शुल्कों को युक्तिसंगत बनाना, बंदरगाहों पर लालफीताशाही खत्म करना और समर्पित माल ढुलाई गलियारों (Dedicated Freight Corridors) को शीघ्र पूरा करना अनिवार्य है। यदि भारत इन संरचनात्मक अड़चनों को दूर कर लेता है, तो वैश्विक विनिर्माण मानचित्र पर उसकी स्थिति सुदृढ़ हो जाएगी।